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राम मंदिर के द्वितीय तल पर स्थापित श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठा वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन और पारंपरिक अनुष्ठानों के बीच संपन्न हुई. इस ऐतिहासिक आयोजन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश की सुख-समृद्धि और लोककल्याण की कामना की. यह स्थापना न केवल धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि अयोध्या के आध्यात्मिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखी जा रही है.

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यह ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयोजन वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और पारंपरिक अनुष्ठानों के बीच संपन्न हुआ, जिसमें भारत की राष्ट्रपति ने स्वयं उपस्थित होकर पूजा-अर्चना की और इस विशेष अवसर की आध्यात्मिक गरिमा को बढ़ाया.

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राम मंदिर के द्वितीय तल पर स्थापित श्रीराम यंत्र को वैदिक आचार्यों ने विधिवत मंत्रोच्चार के साथ प्रतिष्ठित किया. अनुष्ठान के दौरान वैदिक परंपरा के अनुरूप विशेष हवन, पूजन और देव आवाहन की प्रक्रिया पूरी की गई.

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मंदिर परिसर में उपस्थित संत, आचार्य और ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों ने इस क्षण को राम मंदिर के आध्यात्मिक विस्तार की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया. श्रीराम यंत्र की स्थापना को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सनातन परंपरा की ऊर्जात्मक स्थापना के रूप में भी देखा जा रहा है.

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माना जाता है कि श्रीराम यंत्र मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति, सकारात्मक ऊर्जा और दिव्यता को और अधिक सशक्त करता है. यंत्र स्थापना के लिए विशेष मुहूर्त चुना गया, क्योंकि हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि का प्रथम दिन अत्यंत शुभ माना जाता है.

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इसी कारण इस तिथि को यंत्र प्रतिष्ठा के लिए सर्वोत्तम समय माना गया. वैदिक विद्वानों के अनुसार, इस प्रकार के यंत्र देवालय की आध्यात्मिक संरचना को स्थिरता प्रदान करते हैं और भक्तों के लिए विशेष श्रद्धा का केंद्र बनते हैं.

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पूजन के दौरान भगवान श्रीराम के समक्ष देश की सुख-समृद्धि और लोककल्याण की कामना की. मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत सुदृढ़ रही और पूरे कार्यक्रम को गरिमामय वातावरण में संपन्न कराया गया. इस अवसर पर संत समाज, मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे.

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राम मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, चैत्र नवरात्रि की पूर्णाहुति के बाद राम भक्त विशेष पास के माध्यम से श्रीराम यंत्र का दर्शन कर सकेंगे. इसके लिए दर्शन व्यवस्था नियंत्रित रूप में संचालित की जाएगी, ताकि श्रद्धालु सुव्यवस्थित ढंग से इस दिव्य स्थापना के दर्शन कर सकें.

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माना जा रहा है कि आने वाले समय में श्रीराम यंत्र राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा. श्रीराम यंत्र की यह स्थापना अयोध्या के आध्यात्मिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखी जा रही है, क्योंकि राम मंदिर में लगातार धार्मिक परंपराओं और वैदिक विधानों के माध्यम से सनातन संस्कृति को नई ऊर्जा दी जा रही है.

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