-हिंदी भवन में पारदर्शी नीलामी, निवेशकों की दिखी जबरदस्त दिलचस्पी
-25 में से 3 भूखंडों पर लगी ऊंची बोली, जीडीए को मिली बड़ी आय
-शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं को मिलेगी नई रफ्तार
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) द्वारा मधुबन-बापूधाम आवासीय योजना में आयोजित नीलामी ने एक बार फिर शहर में निवेश की बढ़ती संभावनाओं को उजागर कर दिया। लोहिया नगर स्थित हिंदी भवन में बुधवार को आयोजित इस नीलामी में निवेशकों और बिल्डरों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कुल 25 व्यवसायिक एवं ग्रुप हाउसिंग भूखंडों की नीलामी के लिए आयोजित इस प्रक्रिया में भले ही केवल 3 भूखंड बिके, लेकिन इन तीनों पर लगी ऊंची बोली ने जीडीए को करीब 97.98 करोड़ रुपए की आय दिला दी। जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल के निर्देश पर सुबह 11 बजे से शुरू हुई इस नीलामी प्रक्रिया का संचालन अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह की अध्यक्षता में किया गया। इस दौरान ओएसडी कनिका कौशिक, चीफ इंजीनियर आलोक रंजन और सहायक अभियंता सुरजीत कुमार समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। पूरी नीलामी प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और नियमों के अनुरूप संपन्न कराया गया, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ।
नीलामी के दौरान सबसे अधिक आकर्षण मधुबन-बापूधाम योजना के पॉकेट-ए स्थित बड़े भूखंड ने खींचा। 9031.40 वर्गमीटर के इस भूखंड की बेस प्राइस 52,500 रुपए प्रति वर्गमीटर निर्धारित थी, लेकिन प्रतिस्पर्धा के चलते इसकी बोली बढ़कर 87,800 रुपए प्रति वर्गमीटर तक पहुंच गई। अंतत: यह भूखंड 79.29 करोड़ रुपए से अधिक की राशि में बिका, जो नीलामी का सबसे बड़ा सौदा साबित हुआ। इससे यह स्पष्ट हो गया कि बड़े निवेशक अब गाजियाबाद को एक उभरते हुए रियल एस्टेट हब के रूप में देख रहे हैं। इसके अलावा पॉकेट-बी का 695 वर्गमीटर का व्यवसायिक भूखंड भी निवेशकों के बीच खासा लोकप्रिय रहा। 70 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर की बेस प्राइस के मुकाबले इस पर 1,55,600 रुपए प्रति वर्गमीटर तक की बोली लगी और अंतत: यह भूखंड करीब 10.81 करोड़ रुपए में बेचा गया।
वहीं पॉकेट-सी का 1116 वर्गमीटर का भूखंड 70 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर के सापेक्ष 70,500 रुपए प्रति वर्गमीटर की दर से लगभग 7.86 करोड़ रुपए में बिक गया। जीडीए के अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि नीलामी में निवेशकों की उत्साहजनक भागीदारी यह दर्शाती है कि गाजियाबाद में रियल एस्टेट सेक्टर तेजी से उभर रहा है। उन्होंने कहा कि भले ही 25 में से केवल 3 भूखंड बिके हों, लेकिन इनसे प्राप्त हुई बड़ी आय इस बात का संकेत है कि गुणवत्तापूर्ण परियोजनाओं में निवेश करने के लिए लोग तैयार हैं। उन्होंने यह भी बताया कि नीलामी से प्राप्त होने वाली राशि का उपयोग शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, नई विकास परियोजनाओं को गति देने और नागरिक सुविधाओं के विस्तार में किया जाएगा।
गौरतलब है कि मधुबन-बापूधाम योजना जीडीए की प्रमुख आवासीय योजनाओं में से एक है, जहां बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक सुविधाएं और सुव्यवस्थित विकास के कारण निवेशकों की रुचि लगातार बढ़ रही है। जीडीए द्वारा इस तरह की पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया न केवल निवेशकों को आकर्षित कर रही है, बल्कि शहर के समग्र विकास को भी नई दिशा दे रही है। प्राधिकरण के अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में अन्य योजनाओं के तहत भी इसी प्रकार की नीलामियां आयोजित की जाएंगी, ताकि अधिक से अधिक निवेश आकर्षित किया जा सके।
साथ ही आधुनिक शहरी अवसंरचना के विकास और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कुल मिलाकर, इस नीलामी ने यह साबित कर दिया है कि गाजियाबाद न केवल एनसीआर का एक महत्वपूर्ण शहर बनकर उभर रहा है, बल्कि निवेश के लिहाज से भी तेजी से मजबूत हो रहा है। आने वाले समय में इस तरह की पहलें शहर के विकास को और अधिक गति देंगी और इसे एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और समृद्ध शहर के रूप में स्थापित करेंगी।
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