गोंडा जिले के हलधरमऊ ब्लॉक के मैजापुर गांव के बीएससी छात्र सत्यम शुक्ला ने पढ़ाई के साथ पौधों की नर्सरी शुरू कर मिसाल पेश की है. छोटी सी जगह से शुरू हुआ यह काम अब कई जिलों तक फैल चुका है, जहां से आम, अमरूद, गुलाब और सजावटी पौधों की सप्लाई की जाती है. इस नर्सरी से उन्हें सालाना 3 से 4 लाख रुपये की आमदनी हो रही है और 3–4 लोगों को रोजगार भी मिल रहा है.
कहां से आया नर्सरी का आईडिया
सत्यम शुक्ला बताते हैं कि उनका बचपन से ही प्रकृति से काफी लगाव था और उनके बाबा और पिताजी खेती किसानी करते थे, तो उन्होंने सोचा कि यदि हम नर्सरी का बिजनेस करेंगे तो प्राकृतिक से लगाव ही रहेगा, इसीलिए उन्होंने नर्सरी के बिजनेस की शुरुआत की. सत्यम शुक्ला बताते हैं की सबसे पहले मार्केट से थैली लाया जाता है और थैली में मिट्टी और वर्मी कंपोस्ट मिलाकर डाला जाता है, उसके बाद उसमें पौधे की कटिंग लगाकर नर्सरी तैयार की जाती है और कुछ नर्सरी तैयार करने के लिए बीच का भी प्रयोग किया जाता है. शुक्ला बताते हैं कि तीन से चार लोग को हम रोजगार दे रहे हैं. नर्सरी के बिजनेस में साल में डेढ़ से 2 लाख रुपए की लागत लगती है.
कितने का हो जाता है इनकम
सत्यम शुक्ला बताते हैं की नर्सरी के बिजनेस से सालाना 3 से 4 लाख रुपए की इनकम हो रही है. भविष्य में इस बिजनेस को और आगे बढ़ाना है. सत्यम शुक्ला बताते हैं कि हमारे नर्सरी का पौधा गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती सप्लाई होता है. इसी के साथ यहां से छोटे-छोटे नर्सरी वाले भी पौधा ले जाते हैं.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें
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