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होमताजा खबरदेशक्या ईरान जंग से भारत में सड़क का काम भी रुकेगा? कैसे होर्मुज दे रहा टेंशन

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ईरान-अमेरिका-इज़राइल वार की वजह से बंद होर्मुज दूसरे देशों के साथ भारत को भी टेंशन दे रहा है. लंबे समय तक बंद रहने से भारत के एक्‍सप्रेसवे और हाईवे निर्माण पर भी असर पड़ सकता है. इस वार से भारत में निर्माणधीन एक्‍सप्रेसवे और हाईवे पर कैसे पड़ सकता है असर, जानें

क्या ईरान जंग से भारत में सड़क का काम भी रुकेगा? कैसे होर्मुज दे रहा टेंशनZoom

40फीसदी बिटूमिन आयात किया जाता है, होर्मुज के रास्‍ते आता है.

Bitumen Supply Due to Iran war. ईरान-अमेरिका-इज़राइल वार की वजह से बंद होर्मुज दूसरे देशों के साथ भारत को भी टेंशन दे रहा है. लंबे समय तक बंद रहने से भारत के एक्‍सप्रेसवे और हाईवे निर्माण पर भी असर पड़ सकता है. यह भी कहा जा सकता है कि निर्माण तक रुक सकता है, अगर कोई दूसरे विकल्‍प को तैयार न किया गया. हालांकि सड़क परिवहन मंत्रालय की इस संबंध में पूरी नजर है.

देश में हर साल 5000 किमी. से अधिक एक्‍सप्रेसवे और नेशनल हाईवे का ि‍नर्माण होता है. इसके लिए लिए सालाना 8.7 से 9 मिलियन टन बिटूमिन की जरूरत पड़ती है. इनमें से करीब 40 फीसदी तक यानी 3-3.4 मिलियन टन तक आयात करना पड़ता है और 60 फीसदी यही हो जाता है. आयात होने वाले बिटूमिन में सबसे ज्‍यादा इराक से आता है, जो होर्मुज समुद्री जलडमरूमध्य के रास्‍ते भारत आता है.

देश में 5000 किमी. एक्‍सप्रेसवे और हाईवे का ि‍नर्माण हर साल हो रहा है.

इस वजह से सप्‍लाई रुक सकती है

विशेषज्ञों का मानना है कि वार की वजह से अभी इसके शिप का आना जाना बंद है. हालांकि एक दिन पूर्व भारत में एक शिप पहुंचा है. इराक की ओर से आने वाले शिप को लेकर स्थिति स्‍पष्‍ट नहीं है. अगर यहां से शिप नहीं आ जाए तो आयात होकर आने वाले बिटूमिन की सप्‍लाई बंद हो जाएगी, जिससे देश में निर्माणाधीन एक्‍सप्रेसवे और हाईवे भी प्रभावित हो सकते हैं.

कहां से कितना आता है बिटूमिल

आंकड़ों के अनुसार इराक से करीब 50 फीसदी बिटूमिन से आता है. इसके बाद दूसरा नंबर यूएई का है, यहां से करीब 40 फीसदी आता है. वहीं, ईरान से भी आयात होता है. हालां‍कि इसका आकड़ा केवल 10 फीसदी के आसपास ही है. इन सभी जगहों से आने वाला बिटूमिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से हो जहाजों द्वारा द्वारा भारत के पश्चिमी बंदरगाहों कांडला और मुंद्रा तक पहुंचता है. इसके बाद सड़क या रेल मार्ग से संबंधित जगह पहुंचाया जाता है.

ईरान की चेतावनी का असर

ईरान ने यहां से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी दे रखी है, इस वजह से समुद्री यातायात लगभग ठप हो गया है. जहाजों पर बीमा की लागता भी कई गुना बढ़ गयी है, तमाम जहाज जहां यहां रुक गए हैं या तो अफ्रीका के रास्ते डायवर्ट हो रहे हैं.

भारत की तैयारी

देश में चल रहे एक्‍सप्रेसवे और हाईवे का निर्माण न रुकने के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय बराबर इस पर नजर रखे हुए है. जरूरत पड़ने पर बिटूि‍मन के विकल्‍प पर भी विचार किया जा सकता है.

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