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सीकर1 घंटे पहले

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दुबई रहने वाले मामा ने अपने भांजे की शादी में करीब एक करोड़ रुपए का मायरा भरा।

NRI (अप्रवासी भारतीय) मामा ने एक करोड़ का मायरा (भात) भरा है। 10 मार्च को निभाई गई रस्म के दौरान कैश के अलावा करीब 21 लाख की ज्वेलरी के साथ कपड़े और अन्य गिफ्ट भी दिए हैं। यह पूरा मामला सीकर के कुंडलपुर का है।

रानोली क्षेत्र की भरथा वाली कोठी का यादव परिवार पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार बहन मोहिनी देवी के घर (कुंडलपुर) मायरा लेकर पहुंचा था। परिवार सहित दुबई रहने वाले कैलाश यादव ने मायरा भरा। इस दौरान कैलाश के बड़े भाई नारायण यादव और छोटे भाई छोटेलाल यादव भी मौजूद रहे।

कुंडलपुर के रहने वाले डॉ. मनोज की शादी बाय (झुंझुनूं) की डॉ. अंजलि से 11 मार्च को हुई थी। डॉ. मनोज के तीन मामा (कैलाश, नारायण, छोटेलाल) हैं।

बहन मोहिनी देवी के घर मायरा लेकर पहुंचे नारायण यादव ने गले लगाकर बधाई दी।

बहन मोहिनी देवी के घर मायरा लेकर पहुंचे नारायण यादव ने गले लगाकर बधाई दी।

500-500 रुपए के नोट की 102 गड्डियां दीं दूल्हे के मामा कैलाश यादव ने बताया- मायरे में 51 लाख रुपए नकद, करीब 21 लाख रुपए की ज्वेलरी के साथ कपड़े व अन्य गिफ्ट दिए गए। कुल मिलाकर एक करोड़ रुपए के आसपास मायरा भरा है। दूल्हे के पिता मदन खातोदिया की पलसाना में कपड़े की दुकान है। भात में 500-500 रुपए के नोट की 102 गड्डियां दी गईं।

सीकर के कुंडलपुर में मायरे में कुल 51 लाख रुपए कैश दिए गए।

सीकर के कुंडलपुर में मायरे में कुल 51 लाख रुपए कैश दिए गए।

लोगों ने दूल्हे के मामा की सराहना की डॉ. मनोज के मामा का परिवार रानोली की तन में भरथा वाली कोठी का रहने वाला है। सबसे बड़े मामा नारायण यादव और सबसे छोटे मामा छोटेलाल यादव गांव में रहते हैं। दूसरे नंबर के मामा कैलाश यादव परिवार सहित दुबई रहते हैं। कैलाश और छोटेलाल प्रॉपर्टी डीलर हैं।

सीकर के रानोली क्षेत्र की भरथा वाली कोठी के जादम परिवार ने मायरे में कैश के अलावा ज्वेलरी और अन्य गिफ्ट भी दिए।

सीकर के रानोली क्षेत्र की भरथा वाली कोठी के जादम परिवार ने मायरे में कैश के अलावा ज्वेलरी और अन्य गिफ्ट भी दिए।

कैलाश जादम ने कहा- माता-पिता से वादा किया था कि बहनों के लिए क्षमता से ज्यादा सहयोग करेंगे। भांजे/भांजी की शादी में अच्छा मायरा भरना भाइयों की सामूहिक सोच थी। बहन मोहिनी देवी ने तीनों भाइयों को खूब स्नेह दिया।

दूल्हे के पिता मदन खातोदिया ने कहा कि ये मामा-भांजे और बहन-भाई प्रेम का प्रतीक है। बदलते दौर में बहन-बेटियों को लड़कों से ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। ये समाज के लिए पॉजिटिव सोच है।

नोटों की गडि्डयों को कार्टन में रखा गया था। दुबई में रहने वाले मामा ने कहा- बहन ने हम तीनों भाइयों को खूब स्नेह दिया है।

नोटों की गडि्डयों को कार्टन में रखा गया था। दुबई में रहने वाले मामा ने कहा- बहन ने हम तीनों भाइयों को खूब स्नेह दिया है।

‘मायरा या भात’ क्या है? बहन के बच्चों की शादी होने पर ननिहाल पक्ष की ओर से मायरा भरा जाता है। इसे आम बोलचाल की भाषा में भात भी कहते हैं। इस रस्म में ननिहाल पक्ष की ओर बहन के बच्चों के लिए कपड़े, गहने, रुपए और अन्य सामान दिया जाता है। इसमें बहन के ससुराल पक्ष के लोगों के लिए भी कपड़े और जेवरात आदि होते हैं।

बुजुर्गों का मानना है कि ‘मायरा या भात’ को राजस्थानी संस्कृति में बहन-बेटी के घर में आयोजित होने वाले सबसे बड़े समारोह पर आर्थिक संबल देने से जोड़ा गया है। भले ही कानून ने आज बेटों और बेटियों को माता-पिता की जायदाद में बराबरी का हिस्सा दिया हुआ है, इसके बावजूद भी अधिकतर बहनें कभी इस पर अपना दावा नहीं करती है। उनके इसी स्वेच्छा से किए त्याग की भरपाई भाइयों द्वारा ‘मायरे’ में दी गई भेंट से भी करना बताया गया है।

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