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– ‘रंग तो बहाना सै, असली काम सै दिल साफ करणा ‘
-होलिका दहन सिखावै सै बुराई छोड़ कै अच्छाई की राह पकड़णा
-भाईचारा, अपनापन अर सकारात्मक सोच ही सच्ची होली

उदय भूमि संवाददाता
मुजफ्फरनगर। फागुन का महीना लागते ही शहर का मिजाज बदल जावै सै। गली-मोहल्ल्यां में बच्चे रंग अर पिचकारी की बातें करैं सैं, घरां में गुजिया अर पकवान की खुशबू फैल जावै सै अर बाजारां में रौनक नजर आवै सै। हर तरफ उल्लास अर उमंग का माहौल बन जावै सै। होली का तैौहार केवल रंग खेलण तक सीमित ना सै, बल्कि यो मन के बदलाव अर जीवन में सकारात्मकता लावण का संदेश देवै सै। एक्टर, लेखक, कवि, गीतकार अर चित्रकार देव शर्मा ‘लाला जी’ नै होली नै संस्कार परिवर्तन का पर्व बतावै सैं। उनकै कहणा सै,  होली का असली मतलब सै अपने अंदर झांकणा। आदमी दूसरां पर रंग डालण तै पहले अपने मन के मैल नै धो ले। जिब तक अंदर की ईर्ष्या, जलन अर बैरभाव खत्म ना होंगें, तब तक कोई भी तैौहार सच्चे मायने में सफल ना हो सकै।

लाला जी कहवै सैं कि होलिका दहन केवल एक परंपरा ना सै, बल्कि यो प्रतीक सै बुराई के अंत का। जैसे आग में होलिका जल गई, वैसे ही हमें अपने अंदर की बुराइयां जाळ देणी चाहिए। अहंकार, नफरत अर कटुता नै छोड़ कै प्रेम, सहयोग अर सम्मान अपनावैंगे, तभी जीवन में असली रंग भर सकै सैं। उनकै मुताबिक आज के समय में समाज नै सबसे ज्यादा जरूरत सै सकारात्मक सोच की। आज आदमी छोटी-छोटी बातां पर रिश्ते तोड़ दे सै। होली सै अवसर पुरानी बातां भूल कै गले मिलण का। यो तैौहार सिखावै सै कि जिंदगी छोटी सै, इसे प्रेम अर मुस्कान के साथ जीणा चाहिए। होली की खास पहचान आपसी मेलजोल अर भाईचारे तै सै। यहां लोग एक-दूजे के घर जाके बधाई देवैं सैं, मिठाई बांटैं सैं अर पुरानी रंजिशां नै खत्म कर दें सैं।

चौपालां में फाग गाए जावैं सैं, ढोलक की थाप पर लोकगीत गूंजैं सैं अर बुजुर्ग भी इस उमंग में शामिल हो जावैं सैं। देव शर्मा ‘लाला जी’ कहवै सैं,  ‘रंग दो दिन में उतर जावै सैं, पर मीठे बोल जिंदगी भर याद रह जावै सैं। होली का असली आनंद तब सै जिब आदमी किसी दुखी के चेहरे पर मुस्कान ले आवै। जरूरतमंद की मदद करणा भी होली का एक रूप सै। उनकै अनुसार बच्चों नै भी इस तैौहार का सही अर्थ समझाणा जरूरी सै। सिर्फ रंग फेंकण या शोर मचाण तै होली पूरी ना होवै। बड़ों का आदर, छोटां तै स्नेह अर प्रकृति का ख्याल रखना भी उतना ही जरूरी सै।

सूखी होली खेलो, पानी बचाओ अर पर्यावरण की रक्षा करो-यो भी आज के समय की बड़ी जिम्मेदारी सै। अंत में लाला जी संदेश देवै सैं कि होली नै केवल एक दिन का उत्सव ना समझो, बल्कि इसे जीवन में बदलाव का अवसर बनाओ। मन बदलो, सोच बदलो अर अपने संस्कार मजबूत करो। जिब आदमी अंदर तै साफ हो जावै सै, तभी असली खुशियां मिलैं सैं। इस बार होली फेर एक नई सीख दे री सै-बैरभाव भूलो, प्रेम बढ़ाओ अर सकारात्मकता की राह पर आगे बढ़ो। रंगां तै ज्यादा जरूरी सै दिलां का मिलणा, क्योंकि असली होली वहीं सै जिथे मन खुश अर संबंध मजबूत हों।

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