मिडिल ईस्ट में युद्ध की आंच उत्तराखंड के घरों तक पहुंची।
मिडिल ईस्ट में इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष की आंच अब उत्तराखंड के घरों तक महसूस की जा रही है। यूएई और ओमान पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरों ने सैकड़ों परिवारों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। दुबई में परिवार छोड़कर उत्तराखंड आए अल्मोड़ा
दिल हर वक्त दुबई में ही अटका रहता है।
वहीं, ओमान के डुकुम्ब से देहरादून निवासी कैलाश बिष्ट ने वीडियो जारी कर भरोसा दिलाया-
हम सुरक्षित हैं, घबराने की जरूरत नहीं।
ओमान के डुकुम्ब से वीडियो जारी करते कैलाश बिष्ट।
1 किमी दूर ड्रोन अटैक, घरों में मची अफरा-तफरी
रविवार सुबह डुकुम्ब में ‘ओमान ड्राई डॉक’ कंपनी परिसर में दो ड्रोन अटैक हुए। देहरादून के मोहकमपुर माजरी निवासी कैलाश बिष्ट का निवास स्थल घटनास्थल से महज एक किलोमीटर दूर है। धमाके की आवाज से इलाके में हड़कंप मच गया। कैलाश ने उसी दिन वीडियो जारी कर बताया कि हमला कब और कहां हुआ, लेकिन वे और उनके साथ रहने वाले अन्य भारतीय सुरक्षित हैं।
सोमवार को जारी एक और वीडियो में उन्होंने कहा कि अब स्थिति नियंत्रण में है और पोर्ट एडवाइजरी के बाद लोग अपने काम पर लौटेंगे।
‘हर धमाके के बाद फोन की घंटी से डर लगता है’
दुबई में रहने वाले गिरीश पंत इन दिनों काम से उत्तराखंड आए हैं, लेकिन उनका परिवार दुबई में ही है। वे बताते हैं, “दो हमलों की खबर के बाद लगातार घर पर फोन करता हूं। जब तक परिवार की आवाज नहीं सुन लेता, चैन नहीं पड़ता।”
उन्होंने कहा कि वहां की सरकार प्रवासियों को पूरा सहयोग दे रही है, लेकिन हालात को लेकर चिंता बनी हुई है। “बच्चों से सिर्फ इतना कहता हूं- डरना मत, सब ठीक होगा।”
उत्तराखंड आए गिरीश पंत का दुबई में फंसा परिवार।
30-40% भारतीय आबादी, अफवाहों से बचने की अपील
कैलाश बिष्ट ने बताया कि उनकी लोकैलिटी में करीब 30-40 प्रतिशत आबादी भारतीयों की है। उनके साथ आठ अन्य भारतीय भी रहते हैं और सभी सुरक्षित हैं।
उन्होंने कहा, “हम सब लगातार अपने परिवारों के संपर्क में हैं। स्थानीय प्रशासन पूरा सहयोग कर रहा है। किसी भी तरह की फॉल्स या अफवाह भरी जानकारी से बचें।”
ओमान सरकार ने सैन्य मूवमेंट की फोटो-वीडियो साझा करने पर रोक लगाई है और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला बताया है।
सरकार अलर्ट मोड में, प्रवासियों का डेटा जुटाने के निर्देश
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने सभी जिलाधिकारियों, लोकल इंटेलिजेंस और पुलिस को निर्देश दिए हैं कि विदेश में रह रहे नागरिकों का डेटा तैयार किया जाए।
भारत सरकार ने भी एक विशेष लिंक जारी किया है, जिसमें मिडिल ईस्ट में रह रहे उत्तराखंडी अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं, ताकि आपात स्थिति में दूतावास उनसे तुरंत संपर्क कर सके।
युद्ध के बीच साइबर ठग भी सक्रिय
तनावपूर्ण हालात का फायदा उठाकर साइबर ठग भी सक्रिय हो गए हैं। यूएई सरकार ने अनऑथराइज्ड नंबरों से आने वाली कॉल्स को लेकर चेतावनी जारी की है। जिसमें कहा गया है कि किसी भी अनजान कॉल पर QID नंबर या OTP साझा न करें। सैन्य गतिविधियों से जुड़ी फोटो-वीडियो शेयर न करें।
—————————
ये खबर भी पढ़ें :
उत्तराखंड के 50 से ज्यादा लोग ईरान में फंसे: सबसे ज्यादा रुड़की और देहरादून के, इमामबारगाहों में रोया शिया समुदाय
इजराइल-ईरान जंग के बीच वहां उत्तराखंड के 50 से ज्यादा लोग फंस गए हैं। इनमें से सबसे ज्यादा लोग हरिद्वार के रुड़की से शामिल हैं। रुड़की के मंगलौर से लगभग 30 से ज्यादा लोग अभी ईरान में फंसे हुए हैं, जिसमें मंगलौर, जैनपुर झांजेड़ी और टांडा भंडेडा जैसे क्षेत्र के लोग शामिल हैं। (पढ़ें पूरी खबर)
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



