गुजरात से शुरू हुआ सफर
झंकार ग्रुप की कहानी अचानक नहीं बनी. रामसेवक बिंद बताते हैं कि करीब 15–20 साल पहले वे गुजरात में चना जोर गरम बेचते थे. कैंटीनों और छोटे आयोजनों में जाना रोज़मर्रा का काम था. कई बार बुलावा अकेले जाने का होता था और कई बार पूरे दिन काम करना पड़ता था. वहीं उन्होंने महसूस किया कि लोग सिर्फ खाने के लिए नहीं, बल्कि कुछ अलग देखने-सुनने के लिए भी रुकते हैं.
जब चना जोर गरम में जुड़ा संगीत
यहीं से सोच बदली. रामसेवक और उनके साथियों ने ढोलक और हारमोनियम को अपने ठेले के साथ जोड़ दिया. शुरुआत में जो दो-चार शायरियां याद थीं, वे दूल्हा-दुल्हन को सुनाई जाती थीं. बाद में किताबों से शायरी पढ़ी, याद की और उसे लोकधुनों में ढाल दिया. धीरे-धीरे चना जोर गरम, शायरी और संगीत एक साथ लोगों की पसंद बनने लगे.
शौक से पेशा बनने तक
रामसेवक बताते हैं कि एक वक्त आया जब उन्होंने तय किया कि इसे सिर्फ शौक नहीं, पेशे के रूप में अपनाया जाए. चना बेचते हुए शायरी, गाना और हल्का डांस यही झंकार ग्रुप की पहचान बन गई. गुजरात छोड़ने के बाद वे पहले बलिया पहुंचे और फिर अपने मूल जिले गाजीपुर के नोनहरा क्षेत्र के रोहिली गांव में लौटकर इस काम को व्यवस्थित रूप से शुरू किया.
खान सर की शादी से मिली पहचान
झंकार ग्रुप को बड़ी पहचान तब मिली जब वे चर्चित शिक्षक और यूट्यूबर खान सर की शादी में परफॉर्म करने पहुंचे. पूरा दिन गाना-बजाना और चना जोर गरम परोसते हुए बीता. हालांकि व्यस्तता के चलते खान सर से मुलाकात नहीं हो सकी, लेकिन वहां मौजूद मेहमानों ने इस अनोखे अंदाज को खूब सराहा. यही वीडियो और किस्से आगे चलकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आए.
आज क्या है झंकार ग्रुप
रामसेवक बताते हैं कि आज झंकार ग्रुप स्थानीय कार्यक्रमों के लिए लगभग 10,000 रुपये शुल्क लेता है. दूरी और कार्यक्रम के स्तर के हिसाब से चार्ज बढ़ता है. शादी, जन्मदिन या सांस्कृतिक आयोजनों में यह ग्रुप अब सिर्फ नाश्ता नहीं, बल्कि पूरा माहौल तैयार करता है.
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