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चित्रकूट में अब सर्पदंश से मौत के हर मामले में तीन डॉक्टरों के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम कराया जाएगा. यह निर्णय जिलाधिकारी के निर्देश पर लागू किया गया है. प्रशासन का मानना है कि इससे मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि अधिक सटीकता और पारदर्शिता के साथ हो सकेगी.

चित्रकूट: यूपी के चित्रकूट जिले में सर्पदंश से होने वाली मौतों को लेकर अब स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी और महत्वपूर्ण पहल शुरू की है. बुंदेलखंड क्षेत्र में मानसून और उसके बाद के महीनों में सांपों की सक्रियता बढ़ जाती है, जिससे ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश की घटनाएं सामने आती रहती हैं. ऐसे मामलों में अब तक पोस्टमार्टम की जिम्मेदारी एक ही डॉक्टर पर होती थी, लेकिन लगातार बढ़ते मामलों और रिपोर्ट को लेकर उठते सवालों के बाद प्रशासन ने व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है.

सर्पदंश की होगी जांच

बता दें कि चित्रकूट में अब सर्पदंश से मौत के हर मामले में तीन डॉक्टरों के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम कराया जाएगा. यह निर्णय जिलाधिकारी के निर्देश पर लागू किया गया है. प्रशासन का मानना है कि इससे मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि अधिक सटीकता और पारदर्शिता के साथ हो सकेगी. दरअसल, कई बार ऐसा देखने में आया कि परिजन किसी अन्य बीमारी या संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु को सर्पदंश बताकर मुआवजे की मांग करते थे.

वहीं दूसरी ओर कुछ मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सर्पदंश का स्पष्ट उल्लेख न होने पर परिजन आपत्ति दर्ज कराते थे. इन परिस्थितियों में विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती थी. ऐसे में तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम द्वारा इनका पीएम किया जाएगा, ताकि रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की शंका ना हो.

सर्पदंश के मामलों की संख्या सबसे अधिक

वहीं इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी भूपेश द्विवेदी ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि जिले में सर्पदंश के मामलों की संख्या सबसे अधिक है. कई बार पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर सवाल उठते हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग पर दबाव भी बनता है. नई पैनल प्रणाली के तहत अब प्रत्येक संदिग्ध सर्पदंश मृत्यु में तीन चिकित्सक मिलकर विस्तृत परीक्षण करेंगे और सामूहिक रूप से रिपोर्ट तैयार करेंगे. इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि मृत्यु वास्तव में विषैले सर्प के काटने से हुई है या किसी अन्य कारण से हुई है.

मिलेगा मुआवजा

उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि सर्पदंश को प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में माना जाता है और ऐसे मामलों में शासन स्तर से मुआवजा भी मिलता है. इसलिए, पोस्टमार्टम रिपोर्ट की भूमिका बेहद अहम हो जाती है. कई बार सर्प दंश पीएम रिपोर्ट में न आने से परिजनों से बहस भी हो जाती थी, इसलिए जिलाधिकारी के निर्देश में यह फैसला लिया गया है.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

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