Tag: Purvanchal Folk Culture
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आंगन से चौपाल तक गूंजती थी कजरी, सवाल-जवाब में होता था गीतों का मुकाबला वैसे अकबर से भी है ये खास कनेक्शन
जौनपुर: “देवी तोरी सांवली बा सुरतिया, बसी गयु विंध्याचल पहाड़…” फुहार पड़ते ही जब गांव की पगडंडियों पर मिट्टी की सोंधी खुशबू उठती थी, आम की डालियों पर झूले पड़ते थे और नईहर आई बेटियों की हंसी आंगन में गूंजती थी, तब इन्हीं देवी गीतों…