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आगरा का सिकंदरा क्षेत्र सिर्फ अकबर के मकबरे के लिए ही नहीं, बल्कि मरियम-उज़-ज़मानी के मकबरे के लिए भी प्रसिद्ध है. लाल बलुआ पत्थरों से बनी यह ऐतिहासिक इमारत अपनी अनोखी वास्तुकला, शांत वातावरण और मुगल इतिहास से जुड़े रहस्यों के कारण पर्यटकों को आकर्षित करती है. कहा जाता है कि यह इमारत पहले सिकंदर लोदी की बारादरी थी, जिसे बाद में जहांगीर ने अपनी मां के मकबरे में बदलवा दिया.

किस्से

आगरा को प्राचीन नगरी कहा जाता है. यहां मौजूद सैकड़ों मुगलकालीन इमारतें शहर को अलग पहचान दिलाती हैं. आज हम मुगल बादशाह सम्राट अकबर की हिंदू पत्नी जोधा बाई के मकबरे के बारे में बता रहे हैं. कहा जाता है कि जोधा बाई अकबर की पत्नी और जहांगीर की मां थीं, जिन्हें मरियम-उज़-ज़मानी की उपाधि दी गई थी. इसी नाम पर उनका मकबरा आगरा के सिकंदरा क्षेत्र में स्थित है, जिसे मरियम का मकबरा कहा जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह इमारत मूल रूप से सन 1495 में सिकंदर लोदी की ओर से बनवाई गई एक खुली बारादरी थी. बाद में मुगलकाल में जहांगीर ने अपनी मां को दफनाने के लिए इसे मकबरे में बदलवा दिया. तभी से यह स्थान मरियम के मकबरे के नाम से प्रसिद्ध हो गया.

किस्से

सिकंदरा स्थित मरियम का मकबरा बादशाह अकबर के मकबरे के बेहद पास बना हुआ है. दोनों ही ऐतिहासिक इमारतें सिकंदरा क्षेत्र में स्थित हैं. बताया जाता है कि मुगलकाल में ये दोनों परिसर एक साथ जुड़े हुए थे, लेकिन समय के साथ अलग-अलग हो गए. अकबर का मकबरा सिकंदरा चौराहे पर स्थित है, जबकि मरियम का मकबरा वहां से कुछ ही दूरी पर मथुरा की ओर बना हुआ है. आज भी यह मकबरा अपनी ऐतिहासिक और वास्तुकला की खास पहचान बनाए हुए है.

किस्से

सिकंदरा स्थित इस मकबरे को अनोखा मकबरा भी कहा जाता है. इतिहासकारों के अनुसार, आमतौर पर मुगलकालीन मकबरे इस्लामिक वास्तुकला शैली में बनाए जाते थे, लेकिन मरियम का मकबरा खुले मंडप की तरह दिखाई देता है. इस इमारत के चारों कोनों पर मीनारें भी नहीं बनी हैं, जो इसे अन्य मुगलिया मकबरों से अलग पहचान देती हैं. शांत वातावरण और खूबसूरत स्थापत्य कला के कारण यह इमारत खास मानी जाती है.

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किस्से

सिकंदरा स्थित मरियम के मकबरे को देखने के लिए आज भी बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. इतिहासकारों के अनुसार, इस खूबसूरत इमारत के नीचे करीब 40 कमरे बने होने का दावा किया जाता है. बताया जाता है कि इन कमरों में सिकंदर लोदी काल की नक्काशी और मेहराबें आज भी मौजूद हैं. हालांकि, वर्तमान समय में ये कमरे आम पर्यटकों के लिए बंद रखे गए हैं. फिर भी मकबरे की ऐतिहासिक बनावट और शांत वातावरण लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है.

किस्से

मरियम का मकबरा एक बेहद शांत और ऐतिहासिक स्थल माना जाता है. इतिहासकारों के अनुसार, जहांगीर ने अपनी मां का मकबरा इस तरह बनवाया था कि यह उनके पिता मुगल बादशाह सम्राट अकबर के मुख्य मकबरे के पास एक शांतिपूर्ण स्थान पर स्थित रहे. वर्तमान समय में भी यह स्थान अपनी शांति और सुंदर वातावरण के लिए जाना जाता है, जहां पहुंचकर पर्यटक इतिहास और सुकून दोनों का अनुभव करते हैं.

किस्से

मरियम का मकबरा बेहद सुंदर और आकर्षक ऐतिहासिक इमारतों में से एक माना जाता है. इतिहासकारों के अनुसार, इस खूबसूरत इमारत में मुगल वास्तुकला और डिजाइन के साथ हिंदू स्थापत्य कला का भी अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है. इमारत में बने छज्जे, मेहराबें और उन पर की गई नक्काशी इस मिश्रित वास्तुकला शैली को साफ तौर पर दर्शाती हैं, जो इसे अन्य मुगलकालीन इमारतों से अलग पहचान देती है.

किस्से

सिकंदरा स्थित मरियम का मकबरा लाल बलुआ पत्थरों से बना हुआ है. इसके चारों ओर हरियाली और आकर्षक पेड़-पौधे मौजूद हैं, जो इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं. इतिहासकारों के अनुसार, जब जहांगीर का जन्म हुआ था, तब मुगल बादशाह सम्राट अकबर ने जोधा बाई को ‘मरियम-उज़-ज़मानी’ की उपाधि दी थी. इसका अर्थ ‘युग की मरियम’ बताया जाता है. इसी उपाधि के नाम पर यह ऐतिहासिक मकबरा प्रसिद्ध हुआ.

किस्से

आगरा के सिकंदरा स्थित मरियम का मकबरा एक बेहद आकर्षक ऐतिहासिक इमारत माना जाता है. इतिहासकारों के अनुसार, जिन्हें आमतौर पर जोधा बाई कहा जाता है, उनका वास्तविक नाम हीर कुंवारी और हरखा बाई था. वह आमेर के राजा भारमल की पुत्री थीं. कहा जाता है कि मुगल बादशाह अकबर की सबसे खास पत्नियों में उनकी गिनती सबसे ऊपर की जाती थी. मरियम-उज़-ज़मानी के नाम से प्रसिद्ध यह मकबरा आज भी इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

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