Old Kashi Ghats : काशी दुनिया के सबसे पुराने जीवंत शहरों में से एक है. यहां के खूबसूरत घाटों को देखने दुनियाभर से लोग आते रही हैं. ये घाट इस शहर की पहचान बन चुके हैं. 1830 के करीब ब्रिटिश आर्किटेक्ट जेम्स प्रिंसेप ने यहां के घाटों के स्कैचस तैयार किए थे. इन स्कैच से ही काशी का डॉक्यूमेशन किया गया. जेम्स प्रिंसेप ने ही अशोक के शासनकाल की खोज की थी. प्रिंसेप के नक्शे में ही ज्ञानवापी को मस्जिद की जगह मंदिर बताया गया.
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के हिस्ट्री ऑफ आर्ट डिपार्टमेंट में इन्हें सहेज कर रखा गया है. 18वीं और 19वीं शताब्दी के इन तस्वीरों में काशी के प्रमुख घाटों के स्कैच हैं. रामनगर की रामलीला, नाटी इमली के भरत मिलाप के अलौकिक दृश्य भी प्रिंसेप ने तैयार किए. इनकी संख्या 10 से ज्यादा हैं.
छूने की इजाजत किसी को नहीं
बीएचयू के हिस्ट्री एंड आर्ट डिपार्टमेंट की प्रोफेसर ज्योति रोहिल्ला राणा ने बताया कि ब्रिटिश काल के समय काशी के डॉक्यूमेशन के लिए जेम्स प्रिंसेप ने इसे तैयार किया था. हिस्ट्री एंड आर्ट डिपार्टमेंट के पूर्व विभागाध्यक्ष इन तस्वीरों को एक एग्जीबिशन के लिए काशी लाए थे. उसके बाद से इन्हें डिपार्टमेंट में ही सहेज कर रखा गया है. इन दुर्लभ तस्वीरों को देखने और छूने की इजाजत किसी और को नहीं है.
कौन हैं जेम्स प्रिंसेप
जेम्स प्रिंसेप ब्रिटिश काल के मशहूर आर्किटेक्ट थे. उन्होंने ही अशोक के शासनकाल की खोज की थी. 1819 में वो भारत आये थे. उस समय उन्हें कोलकाता में टकसाल अधिकारी बनाया गया था. 26 नवंबर 1920 में उन्हें बनारस का टकसाल अधिकारी बनाया गया. इसके बाद वो बनारस में रहकर यहां के घाट, मंदिर और ज्ञानवापी के स्कैच बनाए. ज्ञानवापी का उनका बनाया नक्शा आज भी सुरक्षित है. उनके नक्शे में ज्ञानवापी को मस्जिद की जगह मंदिर बताया गया था.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें
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