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पूर्वी दिल्ली की संजय झील में पानी का स्तर काफी कम होने से सैकड़ों मछलियों की मौत हो गई। इसका मुख्य कारण झील में पानी की सप्लाई बाधित होने को माना जा रहा है। संजय झील में पानी की सप्लाई दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) द्वारा की जाती है। 

झील का रखरखाव दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) करता है। डीडीए ने जारी बयान में कहा कि झील में पानी का स्तर बनाए रखने के लिए ट्रीटेड पानी की सप्लाई की जिम्मेदारी सरकारी जल एजेंसी को दी गई थी। डीडीए के अनुसार, पास स्थित कोंडली सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से संजय झील तक ट्रीटेड पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाई गई थी।

डीजेबी के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पाइपलाइन में खराबी आने और बाद में मरम्मत कार्य के कारण झील तक पानी की सप्लाई प्रभावित हुई। अधिकारी के अनुसार, पिछले करीब चार महीने से झील में ट्रीटेड पानी नहीं पहुंच पाया है। अधिकारी ने कहा कि करीब चार महीने पहले झील तक पानी पहुंचाने वाली पाइपलाइन खराब हो गई थी। उस समय तापमान ज्यादा नहीं था, इसलिए स्थिति ठीक रही, लेकिन अब भीषण गर्मी के कारण झील सूखने लगी है। यह झील पिछली सरकार के सिटी ऑफ लेक्स कार्यक्रम का हिस्सा रही है। वर्ष 2024 से डीडीए, डीजेबी और अन्य एजेंसियों ने मिलकर झील के पुनर्विकास और सौंदर्यीकरण का काम किया था।

पानी को झील तक पहुंचाने के लिए कई कदम उठाए : डीडीए ने कहा कि बारिश के पानी को झील तक पहुंचाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। जलभराव वाले क्षेत्रों को जोड़ा गया और झील की बाहरी दीवारों के पास ऐसे कई इनलेट पॉइंट बनाए गए, जिनसे सड़कों पर जमा बारिश का पानी सीधे झील में पहुंच सके। डीडीए के अधिकारी ने कहा कि झील के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने और उसकी मरम्मत से जुड़े बड़े विकास कार्य पहले ही पूरे किए जा चुके हैं। 

यमुना में अवैध खनन पर एनजीटी सख्त, जांच और कार्रवाई के आदेश

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने यमुना नदी क्षेत्र में कथित अवैध खनन और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए सख्त रुख अपनाया है। अधिकरण ने उत्तर प्रदेश राज्य पर्यावरण प्रभाव आंकलन प्राधिकरण और जिलाधिकारी गाजियाबाद को परियोजना संचालक को दी गई पर्यावरणीय स्वीकृति वापस लेने तथा खनन पट्टा निरस्त करने के मुद्दे पर जांच कर कानून के अनुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। मामला गाजियाबाद के ग्राम पंचायत पनचायरा स्थित यमुना नदी क्षेत्र में कथित अवैध खनन, मुख्य धारा में खनन, रात्रिकालीन गतिविधियों और भारी मशीनों के उपयोग से जुड़ा है। मामले की सुनवाई अरुण कुमार त्यागी, ए सेंथिल वेल और अफरोज अहमद की पीठ ने की। पीठ ने फोटो, वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर माना कि नियमों के बार-बार उल्लंघन के गंभीर आरोप सामने आए हैं। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में खनन की अनुमति दी जाती है तो पर्यावरणीय शर्तों, सस्टेनेबल सैंड माइनिंग गाइडलाइंस-2016 और मॉनिटरिंग गाइडलाइंस-2020 का कड़ाई से पालन करना होगा। जीपीएस युक्त वाहनों, साप्ताहिक रिपोर्ट और सीसीटीवी निगरानी को भी अनिवार्य किया गया है।

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