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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अमेरिकी विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मार्को रुबियो के साथ बातचीत का बड़ा हिस्सा हिंद प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित रहेगा. इसके अलावा इस दौरान होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी से उभरे समुद्री सुरक्षा और जहाजों की खुली आवाजाही के मुद्दे पर भी बात होगी.
अजीत डोभाल और मार्को रुबियो के बीच आज अहम मुलाकात होने वाली है.
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मार्को रुबियो के साथ एक अहम उच्चस्तरीय बैठक करने जा रहे हैं. सीएनएन-न्यूज18 को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव, सीमा पार आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा और पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है. भारत और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों के बीच होने वाली यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब दुनिया के कई हिस्सों में तनाव तेजी से बढ़ रहा है. माना जा रहा है कि बातचीत में रक्षा सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करने, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे.
प्राप्त जानकारी के मुताबिक अजीत डोभाल अमेरिकी पक्ष को दक्षिण एशिया में भारत की सुरक्षा चिंताओं से अवगत कराएंगे और क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ अमेरिका से और मजबूत समर्थन की मांग करेंगे. बैठक में पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और ISIS से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ साझा रणनीति पर भी चर्चा हो सकती है. दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ खुफिया जानकारी साझा करने और समन्वित कार्रवाई को और मजबूत करने पर जोर देंगे.
सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार डोभाल और रुबियो के बीच बातचीत में ड्रग कार्टेल, संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच बढ़ते गठजोड़ पर भी चर्चा होगी. इसमें सीमा पार आपराधिक और चरमपंथी गतिविधियों में गैंगस्टरों की भूमिका पर भी फोकस किया जाएगा. इस बातचीत का एक बड़ा हिस्सा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित रहेगा. खासतौर पर समुद्री सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर दोनों देश अपनी रणनीति मजबूत कर सकते हैं.
दोनों पक्ष दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के उपायों पर भी चर्चा करेंगे. इसके अलावा क्वाड (Quad) समूह को और मजबूत बनाने तथा समुद्री गतिविधियों से जुड़ी जानकारी साझा करने पर भी बातचीत होगी. सूत्रों के मुताबिक भारत और अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मालाबार’ के दायरे को बढ़ाने पर भी विचार कर सकते हैं. इसके साथ ही समुद्री आपूर्ति मार्गों और सप्लाई चेन की सुरक्षा को लेकर भी रणनीतिक चर्चा होने की संभावना है.
रणनीतिक वार्ता में रक्षा क्षेत्र में गहरे सहयोग और संयुक्त रक्षा उत्पादन पर भी फोकस रहेगा. भारत-अमेरिका ‘इंडिया-US इनिशिएटिव ऑन क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी’ (iCET) के तहत तकनीक हस्तांतरण, एडवांस सिस्टम के सह-विकास और रक्षा उद्योग सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा कर सकते हैं. ऊर्जा सुरक्षा भी इस बैठक का बड़ा मुद्दा रहने वाला है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर उसके असर को देखते हुए दोनों देश स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, परमाणु ऊर्जा और LNG आपूर्ति पर सहयोग बढ़ाने पर विचार करेंगे.
सरकारी सूत्रों का कहना है कि गाजा और ईरान की स्थिति तथा उसके वैश्विक तेल कीमतों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले असर पर भी चर्चा होगी. डोभाल और रुबियो की यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मार्को रुबियो की हालिया मुलाकात के बाद हो रही है. उस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया, व्यापार, रक्षा सहयोग और उभरती तकनीकों पर चर्चा की थी.
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार रुबियो ने कहा था कि अमेरिका ‘ईरान को वैश्विक ऊर्जा बाजार को बंधक नहीं बनाने देगा’ और अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद भारत की ऊर्जा जरूरतों को विविधता देने में मदद कर सकते हैं.
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