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पटना. बिहार की सियासत में भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मुलाकात ने नया सियासी हलचल मचा दी है. नितिन नवीन को जन्मदिन की बधाई के बहाने हुई इस मुलाकात को लेकर कई राजनीतिक संदेश निकाले जा रहे हैं. दरअसल, पश्चिम बंगाल चुनाव में विजय बाद अब बीजेपी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों का ब्लूप्रिंट तेज कर दिया है. ऐसे समय में बिहार की राजधानी पटना में भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव की बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ हुई मुलाकात ने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है. खासकर तब, जब बीजेपी उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल की राजनीति में भोजपुरी चेहरों को लगातार मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है. ऐसे में यह मुलाकात महज शिष्टाचार है या आने वाले बड़े राजनीतिक समीकरणों की शुरुआत, इस पर चर्चाएं तेज हो गई हैं. हालांकि, खेसारी लाल यादव ने राजद में ही रहने की बात कही है, लेकिन उनके इनकार के बावजूद नए राजनीति के संकेत देता है.

बता दें कि खेसारी लाल यादव राजद के टिकट पर छपरा से विधानसभा चुनाव लड़े थे, लेकिन उन्हें बीजेपी उम्मीदवार ने हरा दिया था. चुनाव के दौरान खेसारी लाल यादव ने प्रचार के समय बीजेपी नेताओं से लेकर राम मंदिर तक पर कई ऐसे बयान दिए थे जिसके बाद बीजेपी के वे सांसद जो फिल्मों से भी जुड़े हैं उन्होंने जमकर खेसारी लाल यादव पर निशाना साधा था. चुनाव हारने के बाद से खेसारी लाल कुछ शांत हो गए थे. इसी बीच नितिन नवीन के जन्मदिन के बहाने उनका पटना स्थित आवास पर जाना और जन्मदिन की बधाई देना कई संकेत देता है.

खेसारी बोले- राजनीति से न जोड़ें इस मुलाकात को

दरअसल, खेसारी लाल यादव का बीजेपी नेताओं से मिलना ऐसे समय में हुआ है, जब पार्टी बंगाल चुनाव के बाद अब यूपी चुनाव को लेकर स्टार प्रचारकों की नई टीम तैयार कर रही है. हालांकि, नितिन नवीन और सम्राट चौधरी से मुलाकात के बाद खेसारी लाल यादव ने कहा- बिहार का एक बेटा इतने बड़े पद पर गया है इस नाते भी और आज उनका जन्मदिन भी है, इसलिए बधाई देने आया हूं. इसे राजनीति से नहीं जोड़ा जाए, क्योंकि मैं आरजेडी के साथ ही रहूंगा. नितिन नवीन बड़े भाई हैं और उन्हें जन्मदिन की बधाई देने आया था.

सियासत में हर कदम के पीछे संदेश

खेसारी लाल चाहे कुछ भी कहें, लेकिन कहते हैं ना कि राजनीति में कोई भी कदम बेवजह नहीं उठाया जाता है. राजनीति के जानकारों की मानें तो खेसारी लाल यादव का इस वक्त बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को जन्मदिन की बधाई देना बड़ा संकेत देता है. वह भी तब जब उस समय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी भी मौजूद थे. हालांकि खेसारी ने इसे केवल शिष्टाचार मुलाकात बताया है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे बीजेपी की पूर्वांचल और भोजपुरी वोट बैंक को साधने की बड़ी रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं.

संजय सरावगी का जवाब, मुस्कान में छिपा संदेश

इस मुलाकात पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने मुस्कुराते हुए कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जी का जन्मदिन था. उन्हें बधाई देने आए थे. लेकिन खेसारी लाल यादव को भी पता था कि मीडिया के बहुत सारे कैमरे लगे हुए हैं तो इस बात की चर्चा तो होगी ही. लेकिन चलिए राजनीति है, इससे आगे अभी क्या बोलूं. संजय सरावगी ने साफ संकेत दिया है कि मुलाकात हुई है तो चर्चा भी होगी ही और हो भी रही है. लेकिन एक चर्चा जो सबसे ज्यादा हो रही है वह यह कि क्या उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले खेसारी लाल यादव बीजेपी का दामन थाम सकते हैं.

क्या यूपी चुनाव से पहले थामेंगे बीजेपी का दामन

यह चर्चा इसलिए भी गर्म है कि इस मुलाकात के बाद आगे की राजनीति में बीजेपी के तीन सांसद रवि किशन, मनोज तिवारी और दिनेश लाल यादव निरहुआ का बयान क्या आता है. हालांकि, फिलहाल खेसारी लाल यादव ने आरजेडी के साथ रहने की बात कही है, लेकिन यह भी सच है कि सियासत में संभावनाओं के दरवाजे कभी पूरी तरह बंद नहीं होते. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह मुलाकात केवल जन्मदिन की बधाई थी या आने वाले राजनीतिक बदलाव का ट्रेलर.

स्टार कैंपेनर बन सकते हैं खेसारी, बीजेपी की तैयारी

खबर यह भी है कि इन तीनों सांसद और फिल्म स्टार के साथ खेसारी लाल यादव ने उत्तर प्रदेश चुनाव में प्रचार का मोर्चा संभाला तो विधानसभा चुनाव में बीजेपी प्रचार के मामले में विरोधियों पर भारी पड़ सकती है. जाहिर है इस संभावना को देखते हुए भी बीजेपी प्रयास कर सकती है. ऐसे में सवाल है कि मनोज तिवारी, रवि किशन, दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’, पवन सिंह की तरह अब खेसारी लाल यादव भी अपना राजनीतिक करियर बीजेपी में आगे बढ़ाना चाहते हैं?

आने वाले वक्त पर टिकी निगाहें

बता दें कि खेसारी लाल यादव के प्रति इन तीनों सुपरस्टार ने चुनाव के बाद मोर्चा खोला था, जिसके बाद खेसारी लाल थोड़े बैकफुट पर थे. जानकार बताते हैं कि अगर खेसारी लाल बीजेपी में गए तो उन्हें भी राहत मिल सकती है और बीजेपी में आने के बाद राजनीतिक तौर पर भी खेसारी को आने वाले समय में फायदा मिल सकता है. बहरहाल, आने वाले समय में खेसारी लाल यादव को लेकर निगाहें टिकी रहेंगी कि उनका फैसला क्या होता है .

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