Image Slider

राजधानी की सड़कों पर लटकते बिजली के तारों को खत्म करने और 24×7 निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए सरकार ने मिशन 2030 लॉन्च किया है। ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि इस महायोजना पर सरकार कुल 17,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी। बिजली की लाइनें पूरी दिल्ली में जमीन के नीचे बिछाई जाएंगी। बिजली आपूर्ति को हाई-टेक बनाने के लिए डिजिटल ट्विन तकनीक अपनाई जाएगी। 

ऊर्जा मंत्री ने बताया कि डिजिटल ट्विन तकनीक की खासियत ये है कि कहीं भी बिजली फाल्ट होने पर ये सिस्टम तुरंत सटीक जगह बताएगा। इससे लाइन मैन की घंटों की मशक्कत जहां बचेगी वहीं बिजली तुरंत बहाल होने से स्थानीय निवासियों को घंटों की कटौती से नहीं जूझना होगा। इसका ट्रायल जनकपुरी विधानसभा में शुरू हो चुका है। 

चांदनी चौक जैसी घनी आबादी वाली हेरिटेज मार्केट में तारों के जंजाल को वाराणसी की तर्ज पर अंडरग्राउंड करने के लिए एक अनुभवी एजेंसी तैनात की गई है, जो दो-तीन साल में इस काम को पूरा करेगी। मिशन 2030 का लक्ष्य दिल्ली को बिजली के मामले में सिंगापुर और मुंबई जैसे शहरों के बराबर खड़ा करना है। वर्तमान में दिल्ली में फाल्ट ठीक करने में औसतन 45 मिनट लगते हैं, जिसे घटाकर 30 मिनट से कम करने का लक्ष्य है। सिंगापुर में सालाना बिजली कटौती का औसत महज 1-2 मिनट है, जबकि दिल्ली अब इस मानक की ओर कदम बढ़ा   रही है। छतरपुर में सबसे ज्यादा 160 करोड़ का खर्च : सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल (2025-26) में बिजली वितरण को सुधारने पर 1426.27 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। क्षेत्रवार खर्च के लिहाज से छतरपुर विधानसभा में सबसे अधिक 160.2 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। किराड़ी में 95.32 करोड़, मुंडका में 65.55 करोड़ और नजफगढ़ में 65.55 करोड़ रुपये का काम हुआ है। मुख्यमंत्री के अपने क्षेत्र शालीमार बाग में 8.83 करोड़ रुपये बिजली सुधार पर खर्च हुए हैं।

 

मिशन 2030 में निवेश और लक्ष्य 

17,000                    

करोड़ रुपये 

कुल बजट 

1426.27

करोड़ रुपये पिछले 1 साल में हुए खर्च 

सर्वाधिक खर्च वाली टॉप 3 विधानसभाएं 

छतरपुर (160.2 करोड़) 

किरारी (95.32 करोड़) 

मुंडका (65.55 करोड़)

2031 तक 13 हजार मेगावाट बिजली की होगी जरूरत

बिजली मंत्री ने कहा कि पिछली सरकार से उन्हें जर्जर व्यवस्था विरासत में मिली थी, जहां कई ट्रांसफार्मर 25 साल की उम्र पूरी कर चुके थे। अब भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा रहा है। अनुमान है कि दिल्ली में 2026-27 में बिजली की मांग 9,000 मेगावाट और 2030-31 तक बढ़कर 13,114 मेगावाट तक पहुंच जाएगी। इस बढ़ती मांग को झेलने के लिए सरकार ग्रिड सब-स्टेशनों और ट्रांसफार्मरों की संख्या में भारी बढ़ोतरी कर रही है।सिंगापुर की तर्ज पर सालाना बिजली कटौती को न्यूनतम स्तर पर लाने की तैयारी

बेहतरीन शहरों में शुमार होगी दिल्ली: सूद

ऊर्जा मंत्री ने कहा है कि इस पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य न केवल बिजली कटौती को खत्म करना है, बल्कि वोल्टेज की समस्या को दूर करना और डिजिटल मीटरों के जरिए पारदर्शी बिलिंग सुविधा देनी है। इस निवेश के बाद दिल्ली का बिजली मॉडल दुनिया के बेहतरीन शहरों में शुमार होगा।

हरिनगर और अन्य इलाकों के लिए खास तैयारी  

मिशन 2030 के तहत हर विधानसभा के लिए माइक्रो-प्लान तैयार है। हरिनगर में अगले तीन वर्षों में करीब 222.3 करोड़ रुपये के अतिरिक्त काम होने हैं, जिसमें 102 नए ट्रांसफार्मर और 62.5 किलोमीटर लंबी नई एलटी लाइनें बिछाई जाएंगी। इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग और घरों की छतों पर सोलर पैनल (पीएम सूर्या घर योजना) लगाने के लिए भी ग्रिड की क्षमता बढ़ाई जा रही है, ताकि भविष्य में लोड बढ़ने पर बिजली ट्रिप न हो।

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||