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होमताजा खबरकृषिकम खर्च में बढ़ाना है धान की पैदावार, तो करें DSR टेक्निक का इस्तेमाल

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शाहजहांपुर में कृषि विशेषज्ञ किसानों को धान की सीधी बुआई यानी DSR तकनीक अपनाने की सलाह दे रहे हैं. यह आधुनिक विधि पारंपरिक रोपाई की तुलना में कम पानी, कम मजदूरी और कम लागत में अधिक उत्पादन देने में मददगार साबित हो रही है. वैज्ञानिकों के अनुसार DSR तकनीक से भूजल संरक्षण के साथ किसानों की आमदनी भी बढ़ सकती है.

शाहजहांपुर: खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसान धान की खेती की तैयारियों में जुट गए हैं. पारंपरिक रूप से धान की रोपाई में भारी मात्रा में पानी और मेहनत लगती है, जिससे किसानों की लागत बढ़ जाती है. इसी समस्या के समाधान और गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिक अब ‘धान की सीधी बुआई’ (Direct Seeded Rice – DSR) तकनीक से धान की खेती करने पर जोर दे रहे हैं. यह आधुनिक तकनीक न केवल पानी की बड़ी बचत करती है, बल्कि खेती की लागत घटाकर किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी बेहद कारगर साबित हो रही है.

कृषि एक्सपर्ट डॉ. एन.पी. गुप्ता ने बताया कि धान की सीधी बुआई किसानों के लिए एक मुनाफे का सौदा है. इस तकनीक से खेती करने पर लागत कम और आय अधिक होती है. सबसे बड़ा फायदा पानी का है, इससे लगभग दो से तीन सिंचाइयों की बचत होती है. पारंपरिक रोपाई की तरह इसमें खेत को पानी से लबालब भरने की जरूरत नहीं होती, केवल पर्याप्त नमी ही काफी है. किसान ध्यान रखें कि मई का अंत इसकी बुआई के लिए सबसे उत्तम समय है. समय पर बुआई करने से फसल की कटाई भी सही समय पर हो जाती है.

रोपाई बनाम सीधी बुआई में अंतर

पारंपरिक विधि में किसान पहले नर्सरी तैयार करते हैं और फिर 20 से 25 दिन बाद पौधों को खेत में रोपित करते हैं. इस कद्दू (puddling) करने की प्रक्रिया में भारी मात्रा में पानी, समय और ज्यादा मजदूर लगते हैं. इसके विपरीत, सीधी बुआई तकनीक में गेहूं की तरह ही धान के बीजों को सीधे खेत में बोया जाता है. इससे नर्सरी उगाने और रोपाई करने का झंझट पूरी तरह खत्म हो जाता है, जिससे मेहनत और पैसे दोनों बचते हैं.

पानी की बचत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

अक्सर किसान मानते हैं कि खेत में लगातार पानी भरा रहने से खरपतवार कम उगते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार फसल के बेहतर विकास के लिए खेत में केवल नमी होना ही पर्याप्त है. सीधी बुआई तकनीक से भूजल के अत्यधिक दोहन पर रोक लगती है. आज जब देश के कई हिस्सों में भूजल का स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, यह विधि जल संरक्षण के साथ-साथ धान के उत्पादन को भी बिना प्रभावित किए पर्यावरण-अनुकूल खेती का विकल्प देती है.

आधुनिक मशीनरी का उपयोग

इस तकनीक को और अधिक सुगम बनाने के लिए अब आधुनिक ‘डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) मशीन’ भी बाजार में आ चुकी है. इस मशीन की सहायता से धान की बुआई बेहद आसानी से हो जाती है. सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मशीन बुआई के साथ-साथ खेत में खाद डालने का काम भी एक साथ कर देती है. इससे किसानों का अतिरिक्त समय और लगत बचती है और खाद का सही उपयोग भी सुनिश्चित होता है.

कतारबद्ध बुआई और अधिक पैदावार

मशीन से बुआई करने पर धान के बीज बिल्कुल सीधी लाइनों में बोए जाते हैं, जो पारंपरिक रोपाई में हमेशा संभव नहीं हो पाता है. लाइन में बुवाई होने के कारण पौधों के बीच उचित दूरी बनी रहती है, जिससे बाद में निराई-गुड़ाई, कीटनाशक का या उर्वरक देना काफी आसान हो जाता है. हवा और रोशनी का सही संचरण होने से पौधों का विकास अच्छा होता है, जिससे किसानों को अधिक पैदावार मिलती है.

About the Author

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

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